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Monday, 16 July 2018

नम्रता और क्रूरता

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नम्रता और क्रूरता ये शब्द ही तो हैं । नम्रता से कही गई बात बहुत ही असरदार होती है । क्रूरता तो इंसान को खत्म ही कर देती है। चोट का घाव तो खत्म हो जाता है परंतु क्रूरता से बोला हुआ शब्द मरते दम तक इंसान को तिल - तिल करके मारता है। 
नम्रता से बोले गए शब्द में इतनी ताकत होती है कि, जीर्ण शरीर को भी स्वस्थ कर दे। नम्र बोल कर इंसानियत को बचा लें। 

Sunday, 8 July 2018

काश ऐसा हो पाता ? -------- पूनम माथुर



धोखा खाता 
मरता अन्नदाता 
सूदखोर पैसा बनाता 
कैसा ज़ोर- जुल्म का नाता 
नौजवान सड़कों पर कराहता 
दफ्तर के चक्कर काटता 
हर कोई अमीर नहीं होता 
गरीबों का एक सपना होता 
उनका भी एक धंधा होता 
चैन से दो वक्त खा सकता 
कोई चोर और डाकू नहीं बनना चाहता 
मजबूरी ही तो अंधे कुएं में ले जाता 
जहां से चाह कर भी वापस नहीं आ सकता 
न मौत होती , न आतंक होता 
न राजा होता, न रंक होता 
न रौब होता , न दबाव होता 
धरती और आकाश सभी का होता 
काश ऐसा हो पाता  ? 

Saturday, 7 July 2018

“ये बिल क्या होता है माँ ?” -------- एकता जोशी

एकता जोशी
07-07-2018 

“ये बिल क्या होता है माँ ?” 
8 साल के बेटे ने माँ से पूछा।

माँ ने समझाया -- “जब हम किसी से कोई सामान 
लेते हैं या काम कराते हैं, तो वह उस सामान या काम
के बदले हम से पैसे लेता है, और हमें उस काम या
सामान की एक सूची बना कर देता है, 
इसी को हम बिल कहते हैं।”

लड़के को बात अच्छी तरह समझ में आ गयी। 
रात को सोने से पहले, उसने माँ के तकिये के नीचे 
एक कागज़ रखा, 
जिस में उस दिन का हिसाब लिखा था।

पास की दूकान से सामान लाया 5रु 
पापा की bike पोंछकर बाहर निकाली। 5 रु 
दादाजी का सर दबाया 10 रु 
माँ की चाभी ढूंढी 10 रु
कुल योग 30 रु

यह सिर्फ आज का बिल है , 
इसे आज ही चुकता कर दे तो अच्छा है।

सुबह जब वह उठा तो उसके तकिये के नीचे 30 रु. 
रखे थे। यह देख कर वह बहुत खुश हुआ 
कि ये बढ़िया काम मिल गया।

तभी उस ने एक और कागज़ वहीं रखा देखा।
जल्दी से उठा कर, उसने कागज़ को पढ़ा। 
माँ ने लिखा था --

जन्म से अब तक पालना पोसना -- रु 00
बीमार होने पर रात रात भर 
छाती से लगाये घूमना -- रु 00
स्कूल भेजना और घर पर 
होम वर्क कराना -- रु 00
सुबह से रात तक खिलाना, पिलाना, 
कपड़े सिलाना, प्रेस करना -- रु 00 
अधिक तर मांगे पूरी करना -- रु 00
कुल योग रु 00

ये अभी तक का पूरा बिल है, 
इसे जब चुकता करना चाहो कर देना।

लड़के की आँखे भर आईं
सीधा जा कर माँ के पैरों में झुक गया
और मुश्किल से बोल पाया --

“तेरे बिल में मोल तो लिखा ही नहीं है माँ,
ये तो अनमोल है,"
इसे चुकता करने लायक धन तो
मेरे पास कभी भी नहीं होगा। 
मुझे माफ़ कर देना , माँ।“

माँ ने," हँसते हुए" उसे गले से लगा लिया ।

बच्चों को ज़रूर पढ़ायें यह मेरा निवेदन है ......
भले ही आपके बच्चे माँ बाप बन गए हो ।

साभार : 
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=218948045396891&set=a.108455693112794.1073741829.100018450913469&type=3

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Sunday, 1 July 2018

उनको मेरा नमन -------- पूनम माथुर

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हमारे दादाजी मुझे डाक्टर बनाना चाहते थे , परंतु किसी कारणवश यह संभव न हो सका। चिकित्सा के माध्यम से लोगों को ठीक किया जाता है। कई ऐसे असाध्य रोग होते हैं जिनको चिकित्सक ठीक कर देते हैं। लेकिन आज के जमाने में चिकित्सा को धंधा बना लिया गया है। काश हमारे सभी डाक्टर मरीजों का ख्याल रखते ? 
जो दूसरों की मदद करते हैं उनमें ईश्वरीय गुण हैं उनको मेरा नमन। 

Thursday, 15 March 2018

दर्शन

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Friday, 9 March 2018

दिवस महिलाओं का

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Thursday, 8 March 2018

नारी होना ही लाचारी है

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कितना भी कोई नारी के बारे में कुछ कह दे फिर वही  ढाक  के तीन पात  :







Tuesday, 6 March 2018

हाउसवाइफ -------- निधि गुप्ता


Nidhi Gupta
*हाउसवाइफ*
🌺🌺🌺🌺
मै थक गयी मुझे भी अब नौकरी करनी है..
बस! बड़ी सख्ती के साथ ऋचा ने पति से कहा..
तो पति ने कहा..
मगर क्यों क्या कमी है घर में, आखिर तुम नौकरी क्यों करना चाहती हो?

ऋचा ने शिथिल होकर कहा..क्योंकि मै जानती हूँ कि..
अगर छुट्टी चाहिए तो दफ्तर में काम करो घर में नहीं।
बिना तनख्वाह के सबका रौब झेलो..
इतने सारे बॉस से तो अच्छा है..कि मै नौकरी करूँ..
इंडिपेंड रहूँ..
छुट्टी भी मिलेंगी,
घर में रौब भी रहेगा,
और मेरी डिग्रियाँ भी रद्दी न बनेंगी .
महत्वाकांक्षी लोग रोटी कमाते हैं बनाते नहीं..
दिन भर बाई की तरह लगे रहने वाली..
स्वयं को बनने सँवरने का समय नहीं देती..
तो उसको गयी गुजरी समझा जाता है.
बाई भी अपना रौब जमाती है..
छुट्टी करती है..
बेढंगे काम का पैसा लेती है ..
पर मै मै क्या हूँ..मुझे कभी कोई एक्सक्यूज. नहीं..
कोई तारीफ नहीं..
कोई वैल्यू नहीं..
और 
अपेक्षाओं का अंत नहीं..
ऊपर से नो ऐबीलिटी..
में हूँ ही क्या 
एक मामूली हाउस वाइफ..😢
पति ने कहा नहीं..
तुम अपने घर की बॉस हो।🧙‍♀
मगर तुम में कुछ कमी हैं..
आर्डर की जगह रिक्वैस्ट करती हो..
डाटने की जगह रूठ जाती हो..
गुस्सा.करने वालों को
बाहर का रास्ता दिखाने की वजाय मनाती हो..

नौकरी करके रोज बनसँवर कर..
बाहर की दुनियाँ में आपना वजूद बनाना अपने लिए जीना आसान है..
लेकिन अपने आप को मिटाकर अपनों को बनाए रखनाआसान नहीं होता,

आसान नहीं होता खुद को भुलाकर सबका ध्यान रखना..
*तुम हाउस वाइफ नहीं हाउस मैनेजर हो..*
अगर तुम घर को मैनेज न करो तो हम बिखर जाएँगे..
आदतें तुमने बिगाड़ी हैं.हमारी..
हम कहीं भी.कुछ भी पटकते हैं..
जूते कपड़े किताबें बर्तन.

तुम समेटती रही कभी टोका होता..
ये कहकर पति ने कहा अब से में सच में हैल्प करुँगा तुम्हारी..
चलो मैं ये बर्तन धो देता हूँ.
सिंक.में पड़े बर्तनों को छूते ही ऋचा नाराज हो गयी ..
अच्छा..अब आप ये सब.. करोगे?
हटो..मै आपको पति ही देखना चाहती हूँ बीबी का गुलाम नहीं...
पति ने कहा..अच्छा शाम को खाना मत बनाना पिज्जा मँगालेंगे..
कीमत सुनकर ऋचा फिर..
ये फालतू के खर्चे..
घर का बना शुद्ध खाओ..
पति ने कहा..
तुम चाहती क्या हो..
कभी कभी आराम हैल्प देना चाहूँ तो वो भी नहीं और शिकायत भी...
ऋचा ने कहा..कुछ नहीं गुस्सा मुझे भी आ सकता है.
थकान मुझे भी हो सकती है.
मन मेरा भी हो सकता है..
बीमार में भी हो सकती हूँ..
बस चाहिए कुछ नहीं कभी कभी..झुँझलाऊँ..
गुस्सा करूँ 
तो आप भी ऐसे ही झेल लेना जैसे म़े सबको झेलती हूँ 
मेरा हक सिर्फ आप पर है।
👌🏼👌🏼👌🏼🙏🙏🙏🙏🙏

साभार : 
https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=1829902870643463&id=100008713033185