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Monday, 19 October 2015

कैसे खाएं अरहर की दाल ?

केंद्र सरकार ने ऐसी चली वोटों  की चाल
जनता है बेहाल 
कैसे खाएं अरहर की दाल ?
कैसा मचाया केंद्र ने बवाल ?
कैसे कोई समझे इनकी टेढ़ी चाल ?
दाल सब्जी फल खाने को है जनता बेमुहाल। 
फिर भी सरकार के कान पर नहीं रेंगती है जूँ  :







Thursday, 15 October 2015

सेना में नारी


(बड़ा करके पढ़ने के लिए चित्र पर डबल क्लिक करें और फिर पढ़ें )

सुबह-सुबह आज के अखबार में सेना में सेवारत नारियों के बारे में पढ़ा। नारी को 'शक्ति' का रूप माना जाता है। नवरात्र के दिनों में  माँ 'दुर्गा ' के अर्चना की जाती है माता तो अलौकिक शक्ति हैं। उनसे शक्ति का वरदान मांगा जाता है। परंतु लौकिक जगत में क्या नारी का स्थान ऐसा है? कहीं पर भी हो हर जगह नारी उपेक्षित ही है। सेना में कार्यरत नारियां भी अपने को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। इसी कारण वे असहज रहती हैं। बीच में ही काम छोड़ कर लौट आती हैं। हर जगह नारी -शक्ति को महान माना जाता है, परंतु यह सब क्या है? हर जगह उनके लिए एक सरहद, एक सीमाएं होती हैं । नारी के प्रति भेदभाव 'पशु जगत' व 'पक्षी जगत ' में तो होता नहीं है फिर 'मानव जगत ' में ऐसा भेद क्यों? क्या यही 'मनुष्य ' की श्रेष्ठता है?

Monday, 12 October 2015

समस्या-समाधान

लोग कहते हैं कि, समस्या है पर समाधान भी है। सोचने का नज़रिया बदलिये। अगर खुद से बदलाव नहीं आता है तो लोगों से मिल कर इसका समाधान निकालिए।

Tuesday, 29 September 2015

डिजिटल डीटाक्स


हर चीज़ का नाफा-नुकसान होता है। संतुलित रूप से प्रयोग करने से हर चीज़ ठीक रहती है। काम करने के लिए यह अच्छा साधन है । लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

अति का भला न बरसना , अति की भली न धूप। 
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूक। । 

Monday, 28 September 2015

हालात से कभी घबराना नहीं चाहिए

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इनके जज्बे को सलाम। हर महिला को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और  किसी भी परिस्थिति में टूटना नहीं चाहिए। दुख के बाद ही खुशी होती है। कठिनाइयाँ बहुत बड़ा संबल होती हैं व जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं।  
(पूनम )

Saturday, 26 September 2015

सुनें और समझें --- पूनम

आपने सुना होगा गुस्से में लोग अक्सर यही कहते हैं मैं तुम्हें जान से मार दूंगा। परंतु लोग यह नहीं सोचते हैं कि, क्या ऐसा करना या कहना उचित है। अरे तुम कौन सा तीर मार लोगे? मरने वाला थोड़ा पहले चला जाएगा। फिर तुम्हें भी तो वहीं आना है। क्या तुम अमर हो? 

सुधार या आतंक :

कभी-कभी सुधार करते करते इंसान थक जाता परंतु सुधार नहीं कर पाता है। ऐसी बात नहीं कोई सुधार नहीं चाहता है। अगर सब सुधर जाएँ तो  फिर दुनिया ही निराली होगी। आतंक के माध्यम से लोग डर पैदा करते हैं चाहे वह आतंक घर में, बाहर हो, समाज में, परिवार में या देश में हो, विदेश में या दुनिया में। लोग अपने अंदर रहने वाली बुराई को तो बाहर निकाल नहीं पाते हैं। लेकिन इन आतंकवादियों पर हल्ला बोलते हैं। क्या ये आतंकवादी प्यार या प्रेम नहीं चाहते हैं? क्या वे नहीं चाहते हैं कि उनका भी घर परिवार हो, वे भी सुख चैन की ज़िंदगी जियेँ। हर कोई अमन और चैन चाहता है।हर एक के भीतर खुशी और शांति की चाह होती है। जन्म से सभी इंसान  तो मनुष्य या मानव पैदा होते हैं 'दानव' कौन होता है ज़रा हमें बताइये?

कुछ लोगों के द्वारा कुछ लोगों को दबाया जाता है जैसे जमींदारी प्रथा को ही लें और भी कई उदाहरण हैं मानव द्वारा मानव को त्रस्त करने व मानसिक उत्पीड़न करने के। दबाने कुचलने की स्थिति तो हृदय में आतंक को बढ़ावा देती है। यहीं से फिर बदला लेने की ज्वाला हृदय में धधकती है, वो फिर वृहद हो जाती है। सभी को उनकी योग्यता और कार्य क्षमता के अनुसार दाम प्राप्त हो तो फिर किस बात की लड़ाई होगी? जीवन सुंदर होगा और धरती भी हरी भरी होगी। हर व्यक्ति के अंदर ममत्व और अपनत्व होता है। शैतान बनने पर परिस्थितियाँ मजबूर करती हैं। लेकिन कुछ लोगों को शुरू से बुरा बनाया जाता है। वे जन्मजात नहीं होते हैं। एक बार बुराई के दलदल में फँसने पर वह दलदल में फँसता ही चला जाता है। मुझे तो ऐसा लगता है कि दुनिया में प्यार और प्रेम का प्रतिशत ज़्यादा है बनिस्बत झगड़े और बुराई के । 

चलिये ईश्वर से प्रार्थना करें मानव के कल्याण के लिए । वह सभी को सद्बुद्धि और सन्मति दें;  पृथ्वी पर बसने वाले हर जीव-जन्तु और मानवों के लिए।  कुछ तो लालची व नकलची होते हैं ऐसे लोगों से सावधान रहने की ज़रूरत है। इन पर विश्वास न करें। 
पूनम 
 23-09-2015