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Wednesday, 26 April 2017
Saturday, 6 October 2012
शांति
शनिवार, 11 दिसम्बर 2010
शांति
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| श्रीमती पूनम माथुर |
तुमने मेरी शांति को देखा है?अरे भाई कहाँ गई,वो ,उसी को तो हम सभी ढूंढ रहे हैं.पहले उसके रहने से हमारे घर -संसार में काफी शांति और हंसी -खुशी का माहौल था.हमारा घर हँसता -मुस्कराता था,परन्तु न जाने शांति किधर चली गई ?ढूंढते ढूंढते हम सभी थक गये हैं.परन्तु शांति कहीं दिखाई ही नहीं देती है.अब तो जीना मुश्किल हो गया है.अब उसके बगैर हम सभी कैसे ज़िंदगी गुजारेंगे.बड़ा सूना सा घर लगता है.किसी कम में मन ही नहीं लगता है.
न कुछ खाने की इच्छा होती है,न पीने की.ज़िंदगी बेकार सी हो गई है.कहीं भी मन नहीं लगता है.इतनी बड़ी दुनिया में शान्ति को कहाँ से ढूंढ कर ला पायेंगे.अब हम सभी की राय है कि अखबार और टी .वी .में इश्तहार दिया जाये ,शांति का पता बताने वाले को ५०००० रुपया इनाम दिया जाएगा .इस विषय पर चर्चा हो ही रही थी कि किसी ने दरवाज़ा खटखटाया.
"आप अपनी शांति की तलाश कर रहे हैं न ?
"कहाँ है मेरी शांति ......I जल्दी बताइये ."
तभी उस सज्जन ने कहा -आप अगर शांति को ढूंढते रहोगे ,तो शांति कहीं नहीं मिलने वाली.आप अपने मन क़े अन्दर झांक कर देखें,आपकी शांति वहीं मौजूद है.बस देखने और समझने भर की तो बात है .आप सभी अपने कर्त्तव्य बोध को जानें और समझें.परिवार में सामंजस्य बनायें .एक दूसरे क़े प्रति श्रद्धा और विश्वास व नम्रता का भाव अपनाएं.नफरत त्याग दें.अपने -अपने काम पर सभी लग जाएँ.एक दूसरे की गलतियों पर ध्यान न दें.सही गलत की पहचान कराएँ.बड़ा बड़े की तरह रहे और छोटा ,छोटे की तरह रहे.सभी अपने अधिकार और कर्तव्यों को समझें.तब देखिये,आपके घर में अपने -आप फिर से शांति का प्रवेश हो जायेगा.फिर से शांति छा जायेगी.
आकाश को देखें,सूरज क़े कार्य में कोई व्यवधान नहीं डालता है,चाँद अपनी चांदनी बिखेरता है,तारे टिमटिमाते और चमकते हैं,वायु,जल सभी को सामान्य रूप से प्रकृति प्रदान कर रही है.वहां कोई अव्यवस्था नहीं है.प्रकृति क़े कार्यों में कोई छेड़ -छाड़ नहीं कर रहा है.तब देखिये ,कैसी शांति है.
शांति क़े आभाव में ही तो विश्व भर में तूफ़ान मचा हुआ है.खून -खराबा ,मार -काट ,लूट -पाट ,चोरी -डकैती ,चारों तरफ हा-हा--कार मचा हुआ है.
अगर सभी को सामान्य जीवन जीने का हक मिल जाये तो फिर विश्व शांतिमय हो जाएगा.खैर आप अपने परिवार में अच्छी शरुआत करें.फिर शांति ही शांति है.
6 टिप्पणियां:




सत्य कहा आपने...
विचारणीय आलेख...
बहुत बहुत आभार सांझा करने के लिए...
विशेष:-यह लेख २२ मई २००३ से २८ मई २००३ क़े ब्रह्मपुत्र समाचार आगरा में पूर्व प्रकाशित हो चुका है
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आपने सही तरीके बताये हैं । सारगर्भित लेख ।