सामने-सामने की लड़ाई तो भले ही खत्म हो गई लेकिन अंदरूनी उखाड़-पछाड़ अभी तक जारी है। देश,परिवार,समाज टूटने के बाद भी लोगों को कुछ समझ नहीं आ रहा है। लोगों के सिर पर लड़ाई का भूत सवार है। तेरा-मेरा के चक्कर में पड़े हुये हैं । शरीर छूट जाने के बाद न सीमाएं होती हैं न रिश्ते सब कुछ तो यहीं छूट जाना है फिर काहे बात की लड़ाई?
©इस ब्लॉग की किसी भी पोस्ट को अथवा उसके अंश को किसी भी रूप मे कहीं भी प्रकाशित करने से पहले अनुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें। ©
Showing posts with label भारत. Show all posts
Showing posts with label भारत. Show all posts
Sunday, 6 September 2015
Thursday, 9 April 2015
Subscribe to:
Posts (Atom)



