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Monday, 13 July 2015

जीवनदाता के रूप में नन्ही बच्ची



जिसने अभी दुनिया भी नहीं देखी उसने अंगदान करके दूसरे की जान बचाई।

हम बड़ों को उस बच्ची के माता-पिता से सीख लेनी चाहिए। किसी भी बात के घमंड में इंसान को नहीं रहना चाहिए। यह शरीर तो नश्वर है किसी के काम आ जाये तो अच्छा है । 

Wednesday, 1 July 2015

जलवा है! चुप ............................................................

(1 )
होता क्या है? जलवा 
प्रशासन को मारा लकवा 
लील ली है नौकरशाहों ने जनता की हवा 
घर में ये खाते पूरी-हलवा 
कोई बताए इनकी क्या है दवा ?
खाते में ये जमा करते एक के बदले सवा 
मन के काले, दिखते हैं सफ़ेद लिबास में खोलवा । । 
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(2 )
दिखता नहीं कोई कहीं 
सब कहते हैं हम ही सही 
झूठ का लिखते हैं खाता-बही 
गद्दारों के घर पर कमी नहीं 
गरीबों का खून मथानी से मह रही 
जनता बेचारी दर से चुप रही । । 


Saturday, 27 June 2015

देखा जीवन --- पूनम माथुर

ज़िंदगी को हमने तबाह और बर्बाद होते देखा 
हर चंद घुट-घुट कर सांस लेते हुये देखा 
कोई किसी का नहीं होता यह बात हमने अपनी आँखों से देखा 
तबाही का मंजर है जीवन पल-पल  घुटते हुये देखा 
अपनों को हमने दूसरों में बदलते हुये देखा 
चंद पैसों के आगे सबको गुलाम होते हुये देखा 
सच को झूठ में तब्दील होते हुये देखा 
इंसानियत  को हैवानियत में बदलते हुये देखा 
मिट्टी (तन )को मिट्टी का सौदा करते हुये देखा 
अपनों को अपनों से आँख चुराते हुये देखा 
पूर्णिमा को अमावस्या में जाते हुये देखा।