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Wednesday, 19 June 2013

भूखी नंगी जनता---पूनम माथुर

27-01-2012 को लिखित 
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कैसा है यह गणतन्त्र का त्यौहार
कोई भूखा सोता है कोई नंगा रहता है
कोई बेघर होता है कोई खाते-खाते उल्टी करता है
कैसा है यह गणतन्त्र का त्यौहार
हाँ-हाँ सब करते हैं पर ना ही कोई कुछ करने को तैयार
कैसे होगा भोली-भाली जनता का उद्धारदुष्ट,दुशप्रवहार,संस्कार 
कैसे हम मनाएंगे यह गणतन्त्र का त्यौहार
जब तक हम सभी नहीं लाएँगे सच्चा प्यार-दुलार
तब तक कैसे होगा प्राणियों का सत्कार
छोड़ दो यह नारेबाजी यह सब करना है बेकार
जब तक नहीं पनपते तुम्हारे अंदर अच्छे संस्कार
क्यों करते हो झूठे आडंबर क्यों नहीं करते हो उनका बहिष्कार
जब तक नहीं होगा इंसान के अंदर इंसानियत का संचार
मत करो 'दिखावा' का दुष्प्रचार
दुष्टों को क्यों नहीं लगाते फटकार
कैसे मनाएँ गणतन्त्र का त्यौहार
अपने अन्तर्मन मे ढूंढो अच्छे विचार
तभी मना सकोगे गणतन्त्र का त्यौहार
दुष्टों और भ्रष्टों ने लोगों का जीना और' तंत्र' को कर रखा है लाचार
अमर शाहीदों की कुर्बानी को कर रखा है बेकार
इन्हें मन व जड़ से उखाड़ फेंको तभी होगा गणतन्त्र का सच्चा त्यौहार



जय हिन्द  


(पूनम माथुर)

Monday, 31 December 2012

कहवा चली गइलू बेटी हमार हो ---पूनम माथुर

कहवा चली गइलू बेटी हमार हो अँखिया से ओझल हो गइलू दुखवा देइके माई बाप ,भाई बहिन के रोअत छोड़िके  । सन 2012 अब त जा रहल बा हमरा तोहरा से ना मिले के संदेशवा दे के। काईसन निठुर रे सन 2012 रे हमार बेटी के निगल गइले रे। अब हम कइसे रतिया दिनिया काटब रे। हमार त करेजवा अइठ के चल गइलू हो। हम अपना के कइसे ढाढ़स बधाई हो।  तोहार तो कबनों कसूर ना रहे। नियति के काल तोहारा के खा गईल।

बेटी हो हमारा अपन कोख पर नाज बा कि तू दरिंदन से खूब लड्लू । तू त मर गइलू लेकिन ऊ दरिंदवन सब फांसी मांगत बाड़न स । डरे उ सबहन के हालत खराब । जेल मे कैदियों सबसे पीटातारन स । कुकर्म करे समय त अपना के सबसे ताकतवर समझत  रहन स । अब काहे डर लगल बा।

हमार आंखि से गंगा-जमुना बहरहल बा लेकिन तू हमार बेटी हऊ  एहसे हमारा कौवनों तरह के शरमीनदी नइखे । आज तोहरा वास्ते पूरा भारत वर्ष मे बलात्कार करे वालन के विरुद्ध कारवाई हो रहल बा। तोहार सहादत  बेजा ना जाई तोहार कुर्बानी बेकार  न होई देश भर तोहरा साथे  बाटे। अब समाज के बदले के पड़ी ।औरत के इज्जत आऊर सम्मान त देवे के ही पड़ी। समाज बदली। परमात्मा सृष्टि के रचना औरत आऊर मर्द के द्वारा ही करवावे के खातिर संसार के रचना कइले बाड़न। न कि बलात्कार के खातिर। दिमाग के विकृति के कारण ही त लोग इ सब काण्ड कर देवलन। इंका के ठीक करे के समाज मे चेतना लावे की चाही। हमरा अब कौवनों डर नइखे । बेटी हमार बहादुर रहन हिया। हम अपना बेटी के संस्कार दे ले रही।

हमार आंखि के लोर चूअल अब तब ही बंद हो जब कन्या भ्रूण -हत्या ना होई। सरकार,देश,समाज,परिवार के अब इहे दृढ़ संकल्प लेवे की पड़ी। तब हम समझब की हमार बेटी फिर से हमार कोख मे पल रहल बिया?हम तोहरा के बिदा नइखी कइले। तू त देश के बेटी हऊ। तू त युवा वर्ग के अंदर संस्कार आऊर संस्कृति के मशाल जला देहलू। तोहरा के पूरा देश के तरफ से नमन आऊर श्रद्धांजली।