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Sunday, 7 May 2017
Friday, 4 October 2013
बात है -दिल की ,समय की -बात है -----पूनम माथुर
(1 )
बात है :
परसों की है बात
बना रही थी रोटी सात
कलम और कागज की है बात
चकले और बेलन की है बात
न कागज था न दवात
आ रहे थे मन में खयालात
चूल्हे पर सेंक रही थी रोटी
कभी चकले पर रोटी
कभी तवे पर रोटी
ख्याल आ -जा रहे थे जैसे
पकने और जलने जैसे
हाथ का काम कलम से भी था
हाथ का काम चकले से भी था
पुरानी है चकले और कलमकी दोस्ती
इसके बिना न है इंसान की कोई हस्ती
रोटी और कलम से ही है इंसान की बस्ती
नहीं चलती इसके बिना जीवन की कश्ती
पर जीवन राक्षस और रावण के लिए है सस्ती
भाईचारे और प्यार-प्रेम से होगी जीवन में मस्ती
रंग लाएगी तब विधाता की गृहस्थी । ।
(2)
दिल की बात :
किसी का सब मिल जाता है
किसी का सब लुट जाता है
किसी का घर आबाद हो जाता है
किसी का घर तबाह हो जाता है
किसी के मन में अंधेरा हो जाता है
किसी के मन में उजाला हो जाता है
किसी को हर बार छला जाता है
किसी को हर बार सहा जाता है
दूसरे का दुख देख कर कोई बुद्ध हो जाता है
घर बार छोड़ कर मन शुद्ध हो जाता है
पर आज दूसरे का माल हड़प कर कोई गिद्ध हो जाता है
आँखों में न्याय की आस लिए कोई वृद्ध हो जाता है
दिल की बातें खुद दिल से की जाती हैं
रोना है तो खुद रो लें किसी से कही नहीं जाती हैं। ।
(3 )
समय:
कुछ लोग सकुचाये हुये हैं
कुछ लोग घबराए हुये हैं
कुछ लोग सताये हुये हैं
कुछ लोग शरमाये हुये हैं
कुछ लोग तड़पाये हुये हैं
कुछ लोग आँखों से पर्दा उठाए हुये हैं
क्योंकि ये लोग समाज के बनाए हुये हैं
समाज में अपने आप को ऊंचा उठाए हुये हैं
इसी लिए तो सबके ऊपर शासन जमाये हुये हैं। ।
Wednesday, 28 November 2012
गुरु नानक जयंती ---पूनम माथुर
पावन आज के दिन बा। गुरु नानक जयंती के। आज के दिन के लोग गंगा-स्नान के नाम से भी जाने लन। गुरु जे होवे लन ऊ त अंधकार से मिटा के प्रकाश मे ले जावे के बतावे लन।लेकिन आज के दुनिया मे लोग गुरु के मतलब दूसर बना देवे ला। गुरु मन के उजाला के प्रतीक बा। और गंगा-स्नान भी केतना मिलेला। नहइब त तन के सफाई होई। परंतु गंगा-स्नान से मतलब तन-मन दूनो के सफाई मे बा। गंगा-स्नान करके बाद लोग दान-पुण्य करे ला। इ दान-पुण्य के मतलब अपना मन के द्वार खोल। ताकि जे जरूरत मन्द बा ओहरा के आहार मिल सके ओकरा कोई ठिकाना मिल सके। परंतु आज के जुग मे त दान दे के लोग पत्थर पर मंदिर मे नाम लिखवावे ला। ताकि आवे वाला लोग उंकर नाम के जान सके। वर्तमान मे जेकरा जरूरत बा ओकरा के त ना मिल सकी। अब देखि लोगन जेकरा गरीबी के कारण पढ़ाई-लिखाई मे आगे बढ़े के मौका नइखे मिलला ओकरा के मदद करे। ताकि कोई इंसान बन सके। सही शिक्षा के अभाव के कारण आज मानव के अन्दर चोरी,डकैती ,हर तरह के अपराध हो रहल बा। आज देश मे चाहे नेता होइबे चाहे अभिनेता होइबे,चाहे शिक्षक होइबे,चाहे पुलिस हर कोई हाय हाय मचावे ला । जेकरा कारण इतना तबाही बटुये । अगर हर कोई जमा न करे त धन त दुनिया मे एतना बाटे कि कोई व्यक्ति भूखा -नंगा ना रही। हरके हर कमी पूरा होई। पर हम आगे हम आगे के चक्कर के कारण आज एतना दुनिया खराब हो गईल बा-खून खराबी पर उतर आइल बा।
हर कोई के एक दिन त मर ही के बा। काहे के बम-गोला बरसा के दहशत पैदा करे। अपना बुद्धि आऊर क्षमता के आधार पर सब के सब कुछ मिले के चाहे । तोरा मोरा हाय हाय आपन आपंन लुकावल छिपावल ही घातक हो रहल बा। अखबार मे छपल हम सुनले रही। एक गो बूढ़ा आदमी के पास सोना के गिन्नी रहे। ऊ जब बेमार पड़ल त ओकर पड़ौसी ओकरा के देख भाल करत रहे। पर ऊ जब मर गईल त ओकर दाह संस्कार भईल। सब लोग क़हत रहे की जरूर पड़ौसिया ओकर पईसा के लालच मे मदद करत रहे और सेवा-सुश्रूषा करत रहे। पडौसी त मानव भावना से करत रहे। पर ओकरा बड़ा दुख भईल । ओकरा के जहवा जलावल गईल रहे ओकर राख़ ऊलट पुलट के देखलस तब ओकरा पता चलल की बूढ़ा हलुआ मांग ओकरा अपन सोने के गिन्नी निगल गईल रहे। जब तक सरीर रहे तब तक ही सब कुछ लुका सकल । परंतु मरला के बाद सब कुछ इहे रह गईल । ई सच्ची कहानी के तअ हमनी के इहे सीखे के चाहे। जमा ओतने करे के चाही की हारी-बीमारी या आपत काल मे काम आ सके। जब सब कुछ इहे रह जाई त काहे जादे जमा आऊर काहे लुकावल छिपावल । समाजवाद के भावना से जीये चाहे। जेकर नारा होएके चाहे त " सबका सबके लिए "। जहां पर हमार-हमार के भावना होई होही मे खतरा बाटे । मन के पवित्र करे के चाही। एही से गाना ई गाना पर ध्यान देवे के चाही ---'तोरा मन दर्पण कहलाए,भले बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाये '। एही से हमरा जाने मे आज के दिन गंगा-स्नान और गुरु नानक जयंतीके नाम से जानल जा ला।
हर कोई के एक दिन त मर ही के बा। काहे के बम-गोला बरसा के दहशत पैदा करे। अपना बुद्धि आऊर क्षमता के आधार पर सब के सब कुछ मिले के चाहे । तोरा मोरा हाय हाय आपन आपंन लुकावल छिपावल ही घातक हो रहल बा। अखबार मे छपल हम सुनले रही। एक गो बूढ़ा आदमी के पास सोना के गिन्नी रहे। ऊ जब बेमार पड़ल त ओकर पड़ौसी ओकरा के देख भाल करत रहे। पर ऊ जब मर गईल त ओकर दाह संस्कार भईल। सब लोग क़हत रहे की जरूर पड़ौसिया ओकर पईसा के लालच मे मदद करत रहे और सेवा-सुश्रूषा करत रहे। पडौसी त मानव भावना से करत रहे। पर ओकरा बड़ा दुख भईल । ओकरा के जहवा जलावल गईल रहे ओकर राख़ ऊलट पुलट के देखलस तब ओकरा पता चलल की बूढ़ा हलुआ मांग ओकरा अपन सोने के गिन्नी निगल गईल रहे। जब तक सरीर रहे तब तक ही सब कुछ लुका सकल । परंतु मरला के बाद सब कुछ इहे रह गईल । ई सच्ची कहानी के तअ हमनी के इहे सीखे के चाहे। जमा ओतने करे के चाही की हारी-बीमारी या आपत काल मे काम आ सके। जब सब कुछ इहे रह जाई त काहे जादे जमा आऊर काहे लुकावल छिपावल । समाजवाद के भावना से जीये चाहे। जेकर नारा होएके चाहे त " सबका सबके लिए "। जहां पर हमार-हमार के भावना होई होही मे खतरा बाटे । मन के पवित्र करे के चाही। एही से गाना ई गाना पर ध्यान देवे के चाही ---'तोरा मन दर्पण कहलाए,भले बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाये '। एही से हमरा जाने मे आज के दिन गंगा-स्नान और गुरु नानक जयंतीके नाम से जानल जा ला।
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