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Sunday, 17 July 2016

:काश संसार के सारे इंसान ऐसे हो जाते ?

******** हितोपदेश से बेहतर वृतांत :

एक बार एक लड़का अपने स्कूल की फीस भरने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक कुछ सामान बेचा करता था,
एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे बड़े जोर से भूख भी लग रही थी. उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग लेगा..
पहला दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरवाजा खोला, जिसे देखकर वह घबरा गया और बजाय खाने के उसने पानी का एक गिलास माँगा..
लड़की ने भांप लिया था कि वह भूखा है, इसलिए वह एक.. बड़ा गिलास दूध का ले आई. लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया..
कितने पैसे दूं? लड़के ने पूछा.
पैसे किस बात के? लड़की ने जवाव में कहा.
माँ ने मुझे सिखाया है कि जब भी किसी पर दया करो तो उसके पैसे नहीं लेने चाहिए.
तो फिर मैं आपको दिल से धन्यवाद देता हूँ. जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा, उसे न केवल शारीरिक तौर पर शक्ति मिल चुकी थी , बल्कि उसका भगवान् और आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था..
सालों बाद वह लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी. लोकल डॉक्टर ने उसे शहर के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया..
विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को मरीज देखने के लिए बुलाया गया. जैसे ही उसने लड़की के कस्बे का नाम सुना, उसकी आँखों में चमक आ गयी..
वह एकदम सीट से उठा और उस लड़की के कमरे में गया. उसने उस लड़की को देखा, एकदम पहचान लिया और तय कर लिया कि वह उसकी जान बचाने के लिए जमीन-आसमान एक कर देगा..
उसकी मेहनत और लग्न रंग लायी और उस लड़की कि जान बच गयी.
डॉक्टर ने अस्पताल के ऑफिस में जा कर उस लड़की के इलाज का बिल लिया..
उस बिल के कौने में एक नोट लिखा और उसे उस लड़की के पास भिजवा दिया. लड़की बिल का लिफाफा देखकर घबरागयी..
उसे मालूम था कि वह बीमारी से तो वह बच गयी है लेकिन बिल कि रकम जरूर उसकी जान ले लेगी..
फिर भी उसने धीरे से बिल खोला, रकम को देखा और फिर अचानक उसकी नज़र बिल के कौने में पैन से लिखे नोट पर गयी..
जहाँ लिखा था, एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का भुगतान किया जा चुका है.
नीचे उस नेक डॉक्टर होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे.
ख़ुशी और अचम्भे से उस लड़की के गालों पर आंसू टपक पड़े उसने ऊपर कि और दोनों हाथ उठा कर कहा,
हे भगवान..! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद..
आपका प्यार इंसानों के दिलों और हाथों के द्वारा न जाने कहाँ- कहाँ फैल चुका है.
अगर आप दूसरों पर.. अच्छाई करोगे तो.. आपके साथ भी.. अच्छा ही होगा ..!!
अब आपको दो में से एक चुनाव करना है..!
या तो आप इसे शेयर करके इस सन्देश को हर जगह पहुंचाएँ..
या अपने आप को समझा लें कि इस कहानी ने आपका दिल नहीं छूआ..!!
PLZZ SHARE!!!!!
साभार :
https://www.facebook.com/209184759431319/photos/a.209186616097800.1073741828.209184759431319/259134634436331/?type=3
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काश संसार के सारे इंसान ऐसे हो जाते ? मानवीय समवेदनाओं से भरी हुई रचना प्रेरक है। अगर सारा संसार ऐसा होता तो आतंक का साया ही खत्म हो जाता। दुनिया खुशहाल होती। 
(पूनम )

Friday, 4 October 2013

बात है -दिल की ,समय की -बात है -----पूनम माथुर




 (1 )
बात  है :
परसों की है बात
बना रही थी रोटी सात
कलम और कागज की है बात 
चकले  और बेलन की है बात
न कागज था न दवात 
आ रहे थे मन में खयालात 
चूल्हे पर सेंक रही थी रोटी 
कभी चकले पर रोटी 
कभी तवे पर रोटी 
ख्याल आ -जा रहे थे जैसे 
पकने और जलने जैसे 
हाथ का काम कलम से भी था 
हाथ का काम चकले से भी था 
पुरानी है चकले और कलमकी दोस्ती 
इसके बिना न है इंसान की कोई हस्ती 
रोटी और कलम से ही है इंसान की बस्ती 
नहीं चलती इसके बिना जीवन की कश्ती 
पर जीवन राक्षस और रावण के लिए है सस्ती 
भाईचारे और प्यार-प्रेम से होगी जीवन में मस्ती 
रंग लाएगी तब विधाता की गृहस्थी । ।  

(2)

दिल की बात :
किसी का सब मिल जाता है 
किसी का सब लुट जाता है 
किसी का घर आबाद हो जाता है 
किसी का घर तबाह हो जाता है 
किसी के मन में अंधेरा हो जाता है 
किसी के मन में उजाला हो जाता है 
किसी को हर बार छला जाता है 
किसी को हर बार सहा जाता है 
दूसरे का दुख देख कर कोई बुद्ध हो जाता है 
घर बार छोड़ कर मन शुद्ध हो जाता है 
 पर आज दूसरे का माल हड़प कर कोई  गिद्ध हो जाता है 
आँखों में  न्याय की आस  लिए कोई  वृद्ध हो जाता है 
दिल की बातें खुद दिल से की जाती हैं 
रोना है तो खुद रो लें किसी से कही नहीं जाती हैं। ।  

(3 )
समय:
कुछ लोग सकुचाये हुये हैं 
कुछ लोग घबराए हुये हैं 
कुछ लोग सताये हुये हैं 
कुछ लोग शरमाये हुये हैं 
कुछ लोग तड़पाये हुये हैं 
कुछ लोग आँखों से पर्दा उठाए हुये हैं 
क्योंकि ये लोग समाज के बनाए हुये हैं 
समाज में अपने आप को ऊंचा उठाए हुये हैं 
इसी लिए तो सबके ऊपर शासन जमाये हुये हैं। ।